31 जुलाई 2025 का पंचांग

1 अगस्त 2025 पंचांग: अष्टमी तिथि, स्वाति–विशाखा नक्षत्र, शुभ योग और तुला में चंद्र गोचर

1 अगस्त 2025 का पंचांग
31 जुलाई 2025 का पंचांग

जानें 1 अगस्त 2025 का पंचांग

1 अगस्त 2025 का पंचांग, शुक्रवार को श्रावण मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि है। यह दिन कालयुक्त संवत्सर में विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 (विश्वावसु) के अंतर्गत आता है। तिथि के अनुसार, स्वाति नक्षत्र प्रातः 3:40 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात विशाखा नक्षत्र का आरंभ होगा। योग की बात करें तो प्रातः 5:30 बजे तक शुभ योग प्रभावी रहेगा, फिर शुक्ल योग लगेगा। करण में पहले विष्टि करण शाम 6:11 बजे तक रहेगा, जिसके बाद बव करण शुरू होगा। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में संचार करेगा, जो मानसिक संतुलन और सौंदर्यबोध को बढ़ावा देता है। वहीं राहुकाल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा, अतः इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य टालना उचित रहेगा।


1 अगस्त 2025 का विस्तृत पंचांग (शुक्रवार)

विवरणजानकारी
दिनशुक्रवार
माहश्रावण मास (शुक्ल पक्ष)
तिथिशुक्ल अष्टमी (04:58 AM से अगली सुबह 07:23 AM तक)
विक्रम संवत2082 (कालयुक्त)
शक संवत1947 (विश्वावसु)
ऋतुवर्षा ऋतु
सूर्योदय06:02 AM
सूर्यास्त07:03 PM

चंद्रमा की स्थिति

  • चंद्र राशि: तुला राशि में संचार
  • नक्षत्र:
    • स्वाति – 12:41 AM से 03:40 AM (2 अगस्त) तक
    • तत्पश्चात विशाखा नक्षत्र प्रारंभ

योग और करण

  • योग:
    • शुभ योग – 05:30 AM तक
    • तत्पश्चात शुक्ल योग
  • करण:
    • विष्टि – 06:11 PM तक
    • तत्पश्चात बव करण प्रारंभ

राहुकाल और अशुभ समय

  • राहुकाल: 10:55 AM – 12:33 PM
  • यमगंड काल: 03:49 PM – 05:27 PM
  • गुलिक काल: 07:40 AM – 09:18 AM
  • दुर्मुहूर्त: 08:12 AM – 09:06 AM
  • वर्ज्य काल: कोई नहीं

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:26 AM – 05:14 AM
  • अभिजीत मुहूर्त: 12:08 PM – 01:01 PM
  • अमृत काल: रात्रि 10:00 PM से 11:45 PM (उदाहरणार्थ)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: नक्षत्र परिवर्तन पश्चात विशाखा में बन सकता है (स्थिति पर निर्भर)

दिन का विशेष महत्व

1 अगस्त 2025, शुक्रवार को श्रावण शुक्ल अष्टमी तिथि है, जिसे शक्ति की उपासना और व्रतों के लिए विशेष माना गया है। यह दिन देवी दुर्गा या काली की आराधना हेतु उत्तम है।

चंद्रमा का तुला राशि में गोचर सौंदर्य, संतुलन और कला के प्रति झुकाव को बल देता है। स्वाति और विशाखा नक्षत्र के प्रभाव से दिन संवाद, शिक्षा और रचनात्मकता के लिए उत्तम रहेगा।

शुभ योग से आरंभ होकर दिन में शुक्ल योग बन रहा है, जो कार्यों की सिद्धि में सहायक है। विष्टि करण के दौरान विशेष सतर्कता रखें, परंतु बव करण के बाद कार्यों के लिए दिन शुभ रहेगा।

राहुकाल के समय कोई नया कार्य या यात्रा शुरू न करें। अन्यथा, दिन भर का समय अनुकूल और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहेगा।



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